Navratri | The Nine Day Celebrations and Your Planing

by - September 20, 2017



Navratri | The Nine Day Celebrations and Your Planing

नवरात्रि पर्व, एक आधुनिक समीक्षा,
ग्रीष्म ऋतू अब अपनी उतराई पर है, किन्तु उत्तर भारत में अभी भी उमस और सूर्य की लालिमा शरीर की चुभन को अशांत किये हुये है. कदाचित, इस कष्टदाई वातावरण से मुक्ति अब नवदेवी पूजन के पश्चात ही संभव हों. जी हां श्रीमन, भले ही शरद आने में विलम्ब हो परन्तु, शारदीय नवरात्रि का विलम्ब समाप्त हो चुका हैं, और माँ के प्रति भक्तों के भाव में तनिक भी परिवर्तन होगा ऐसा इस बार भी असंभव सा ही है. 

वर्षों बीतने के पर भी इस त्योहार के प्रति लोगो की श्रद्धा अटूट है, और आधुनिकता की चकाचौंध तनिक भी इसके प्रताप को धूमिल नहीं कर पाई है. पश्चिमी त्यौहारों के प्रति विशेष सजक आज के युवा वर्ग, नौ दिवसीय कठिन व्रत का पालन करने में भी अग्रज हैं. विधि विधान, पूजा पद्धिति की विस्तृत जानकारी न हो इस पीढ़ी को पर मंदिर में जल चढ़ाने मे सदैव आतुर हैं. इससे दिनचर्या में कुछ देर शांति भी तो मिलती है.

आडम्बर या महिमा 
नौजवान जो कभी अवसर नही छोड़ते देर रात मांस, मदिरा और भोग विलासिता का, परंतु इन दिनों किसी भी ऐसे आयोजन से अपने को ऐसे दूर रखते है जैसे कोई साधु संत स्वयं को भौगोलिक मोहमाया से. नवयुवतियां भी संयम की पराकाष्ठा का पूर्ण ध्यान रखते हुए सादा भोजन ही ग्रहण करती है और अधिकाधिक समय देवी भजन में लगाने का प्रयास करती रहती हैं. 😂😂

जैसे कुछ लोग बारम्बार हरिद्वार यात्रा करते हैं पाप के घड़े के धोने हेतु, वैसे ही तरुण और तरुणियों अपने अपराध बोध को नौ दिनों के इस पावन पर्व से ढकने का हर संभव प्रयास करते हैं. परंतु कुछ सच्चे भाववाले भक्तजन शेष दिनों की भांति ही, हृदय से माता की महिमा में लीन रहते हैं और सभी की मनोकामना पूर्ण हो यही प्रार्थना भवानी से करते हैं.

पितृ पक्ष और आर्थिक मिठास व् कड़वाहट
नवरात्री से पूर्व, पितृपक्ष की मंदी समस्त व्यापारियों की जान पे बन के आती है क्योंकि आज भी इन दिनों लोग शुभ कार्य आरंभ करने से डरते हैँ और ना ही किसी भी प्रकार की मूल्यवान वस्तु का विनिमय स्वीकार करते हैं. सब मानने न मानने पे निर्भर है क्योंकि धारा की विपरीत, देश में बुलेट ट्रेन का शिलान्यास और सरदार सरोवर बांध का उद्धघाटन श्राद्ध में ही हुआ, जबकि स्वयं श्री मोदी देवी के अनन्य भक्त है और कार्य को आगे टाल सकते थे. 

परंतु जनता की भावनाओं को देखते हुए बड़ी इ-कॉमर्स कंपनियां नवरात्री के शुभ मुहरत से ही वर्ष की महा बचत योजना का आरंभ करती आ रही हैं. और इस मंथन में निर्धन भी अपनी साल भर पूंजी लगा कर धनकुबेर बनने का सपना संजोय पाले बैठे हैं. असहनीय मार तो पूरे नो दिन मांस व्यापारियों को सहनी पड़ती हैं, पर इस शुभ अवसर का लाभ वो देशाटन या माता के दर्शन कर उठा सकते हैं क्यों की विजय-दशमी के पश्चात् तो तामसिक भोजनालय के द्वार पुनः खुल जाने हैं. 🍡🍻

रात्रिकालीन जागरण मंचन
नरेन्द्र चंचल जैसे भजन गाने वाले भले हे अब माता की भेंटे न गाते हों, पर माता की चौकी और जगराता को भारत में प्रचलित करने व् “जय अम्बे विशाल भगवती जागरण” जैसे समितियों का गठन करने में, टी’सीरीज़ के अतिरिक्त इनका भी भरपूर योगदान रहा है. हालांकि, जागरण का आयोजन लोग अपनी कोई मनोकामना पूर्ण होने या किसी विशेष फल प्राप्ति के लिए भी करते हैं. वो चाहे बरसो बाद की संतान सुख प्राप्ति, मूलत पुत्र, या विवाह पश्चात् वर-वधू की मंगल कामना हों. 👪

परन्तु अब ये बस थोड़ी देर का DJ-मंचन भर रह गया है, माथा टेको, और सुबह पूरी प्रसाद ग्रहण करने पहुँच जावो. अब रात भर भेंटे गाने की परम्परा समाप्त सी हों गयी है क्योंकी ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि और लोगी की श्रध्दा कमी, इसके मूल कारण हैं. 👈

तुलिसदास द्वारा प्रारंभ हुई रामलीला मंचन श्रृंखला ने अब नए आयाम जोड़ दिए हैं. तकनीक के विस्तार ने अब घर बैठे रामलीला देखने की सुविधा उपलब्ध करा दी है, और जल्दी जाके पहली पंक्ति वाली सीट, पहले दरी, वाली भागमभाग कुछ तो कम कर ही दी है. नगर की प्रतिष्ठित लवकुश रामलीला समिति आदि से प्रेरणा लेकर अब नुक्कड़ वाली समितिया भी लोगो को आकर्षित करने के लिए के विशाल पुतले, विशेष अतिथि का आह्वान कर रहीं हैं और अग्निदाह भी उनसे करवा रही है. 👹💥

बंगाल में प्रसिद्ध दुर्गा पूजा ने अब नए महानगरो में अपनी धूम मचा दी है, और गणेश चतुर्थी, छठ की भांति अब ये त्यौहार राज्यों की परिधि से बंधा नहीं है. और न जाने कितनी सुसजित, विराट मूर्तियाँ देश की नदियों में विसर्जन को तैयार हैं.

आपके विकल्प
👉KFC से ध्यान हटायें, कुछ दिन पतंजलि की दाल, रोटी का सेवन करें. ✍
👉आईपॉड में, अनूप जलोटा के भजन सुन सकते है, सनी लियॉन के ब्लू है पानी के लिए पूरा वर्ष है. 👊
अगर चेहरा दिखाने से डरते हैं तो प्रयास कीजिये कहीं जामवंत का पात्र मिल जाये या स्वंय सेवक बन मंचन में सहायता भी कर सकते है. 🙈
👉रावण जलता देखने जाये! डर लगता है कहीं पुतले मैं अपनी झलक मिल गई तो? नहीं नहीं आप जैसे बहुत होंगे ऐसा मनाने वाले, निश्चिंत रहें और बच्चो को साथ ले जाएँ. 👪👈
👉दिवाली का साजो सामान कहा से लें, बड़ी समस्या है, सोचना क्या है, snapdeal, flipkart, amazon, सबकी सेल है, मोबाइल उठाये और मंगाइए.👜
👉अगर भक्ति में रूचि नहीं हों, तो निकल जाये कहीं भी, यात्रा के ऑफर भी कम नहीं हैं. 💞
👉अन्यथा नदियों और वातावरण के स्वच्छ अभियान में हाथ बंटा सकते हैं, या प्रतिउत्तर में अपने विचार प्रकट भी कर सकते हैं!! जय माता की. 👌

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